मनोगत

कोरोना का संकट दुनियां में बड़े बदलाव लेकर आया है। आंख मूंदे और मुठ्ठियां भींचे अंधाधुंध दौड़ रहे लोग यकायक ठहर गये। अब वे भौचक होकर सोच रहे हैं कि दौड़े बहुत, लेकिन पहुंचे कहीं नहीं। अपना परिवेश छोड़ आये। नये में ढ़ल नहीं सके। जहां हैं वहां होना न ...Read More

संवाद

आवरण कथा, 2020-06-01

बडे़ बदलाव की दस्तक

कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हालात में भारतीय मीडिया ऐसे बडे़ बदलाव के मुहाने पर पहुंच गया है जहां मीडिया मालिकों, मीडियाकर्मियों और पाठकों/श्रोताओं सहित ‘न्यूजमेकर्स’ को भी अपनी ...

विमर्श, 2020-06-01

होना मेरे मैं सा

जैसे ही किसी जनसामान्य को पता चलता है आप एक कलाकार हैं, आप किसी को चित्रित कर सकते हैं तो वह व्यक्ति विस्मय और कुतूहल से भरकर पूछ बैठता है- मेरा चित्र बना ...

जम्मू कश्मीर, 2020-06-01

मौसम-समाचार का नया हथियार

सूचनाएं हमेशा से हथियार के रूप में काम करती रही हैं, इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। समाचार भी हथियारों की तरह उपयोग में लाए जाते रहे हैं, इसके भी अनेक उदाहरण...

लोक संवाद, 2020-06-01

कोरोना काल में उत्सवधर्मी समाज का लोकसंवाद

भारत के वाचाल समाज ने हमेशा ही दुनिया के तमाम संकटों में एक नई दृष्टि के साथ समाधान की बात कही है। भारत में यह काम हमेशा ही लोकसंवाद के...

ग्लोबल मीडिया, 2020-06-01

अल-जजीरा तेरे देश में

अल-जजीरा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की स्थिति और अल्पसंख्यकों की हालत को लेकर खासा चिंतित रहता है, लेकिन उसके अपने देश में इन मुद्दों की हालत काफी चिंताजनक है। इन सभी मोर्चो...

व्यक्तित्व, 2020-05-08

पत्रकारिता के प्रकाशपुंज बाबूराव विष्णु पराड़कर

भारत में पत्रकारिता का उदभव ही राष्ट्रव्यापी पुनर्जागरण और समाज कल्याण के उद्देश्य से हुआ था। महात्मा गांधी, बाबूराव विष्णु पराड़कर, गणेश शंकर विद्या...

शब्दावली, 2020-06-01

मिलेनियल्स

सामान्य प्रचलन में एक मान्यता है कि हर तीस वर्ष के अंतराल पर एक नई पीढ़ी आकार लेती है। मिलेनियल्स शब्द भी एक निश्चित अवधि के दौरान जन्म लेने वाली पीढ़ी को ...