मीडिया के चीनी मिशन


हालिया वर्षों में अमेरिका और चीन के संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। बात चाहे ट्रेड वॉर की हो, या उईगर मुस्लिम उत्पीड़न और हांगकांग में चीन के बढ़ते अतिक्रमण पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आलोचनात्मक रुख, कोरोना वायरस पर चीन को हर मोर्चे पर घेरने की हो या अमेरिका में फैले दंगों पर चीन की प्रतिक्रिया जैसे अनेक मुद्दों ने दोनों देशों को आमने-सामने खड़ा कर रखा है। इस बीच लड़ाई अब मीडिया के मोर्चे पर भी छिड़ गई है।

 

ट्रम्प प्रशासन ने 22 जून को चार चीनी मीडिया आउटलेट्स को यह कहते हुए फॉरेन मिशन घोषित किया है कि ‘वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र हैं’। जिनमें चाइना सेंट्रल टेलीविजन, चाइना न्यूज सर्विस, द पीपल्स डेली और द ग्लोबल टाइम्स शामिल है। स्टेट डिपार्टमेंट प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टगस के अनुसार ‘पिछले एक दशक से खासतौर पर शी जिनपिंग के कार्यकाल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने चीनी समाचार एजेंसियों, चैनलों, अखबारों को चीन के प्रोपगेंडा आउटलेट के रूप में स्थापित किया है और उन पर अधिक व प्रत्यक्ष नियंत्रण है’।

 

चीनी मीडिया के आउटलेट्स को अब अमेरिका में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। फॉरेन मिशन एक्ट के अन्तर्गत विदेशी दूतावास पर जो नियम लागू होते हैं, वही नियम इन आउट्लेट्स पर भी लागू होंगे। इन आउट्लेट्स को अब अपने कर्मियों के नाम, व्यक्तिगत सूचना, अमेरिका में चीनी मीडियाकर्मियों की संपंत्तियों का पूरा विवरण और संस्थान के टर्नओवर की पूरी जानकारी तथा रियल एस्टेट होल्डिंग्स की सूची यूएस स्टेट डिपार्टमेंट को नियमित तौर पर रिपोर्ट करनी होगी। साथ ही संयुक्त राज्य में इन आउट्लेट्स के कर्मियों की संख्या कितनी होगी, यह भी स्टेट डिपार्टमेंट तय करेगा।

 

अमेरिका और चीन के बीच मीडिया वॉर पिछले कई महीनों से चल रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने मार्च में कहा था कि ‘बीजिंग में लंबे समय से पत्रकारों को डराया और परेशान किया जा रहा है’ जिस कारण प्रमुख चीनी मीडिया आउटलेट्स के अमेरिकी कार्यालयों में पत्रकारों की संख्या में कमी की जा रही है। जवाब में, चीन ने न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और वाशिंगटन पोस्ट के कई अमेरिकी पत्रकारों को चीन से निष्कासित कर दिया।

 

यह दूसरी बार है कि चीनी मीडिया पर अमेरिका ने फॉरेन मिशन एक्ट लगाया गया। इससे पहले फरवरी में चीन की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी सिन्हुआ, चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन), चाइना रेडियो, चाइना डेली डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन और हाई तेअन डेवलपमेंट यूएसए को विदेशी सरकारी अधिकारियों के रूप में माना, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में कार्यरत राजनयिकों के समान नियमों के अधीन हैं। बकौल मॉर्गन ऑर्टगस ‘ये नौ चीनी मीडिया संस्थाएं फॉरेन मिशन एक्ट के अन्तर्गत आती हैं क्योंकि इन पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना सरकार का नियंत्रण है और यह विदेशी सरकार के स्वामित्व वाली एजेंसियां है’।

 

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार हाल के कई वर्षों से, अमेरिकी अधिकारियों द्वारा चीनी समाचार संगठनों की बढ़ती संख्या पर सख्त वीजा पारस्परिकता और अमेरिका में चीनी मीडिया के आउटलेट को विदेशी दूतावास घोषित करने पर चर्चा चलती रही है, क्योंकि बीजिंग ने विदेशी पत्रकारों को जारी वीजा और उनके निवास परमिटों को सीमित करना शुरू कर दिया था।

 

यह पहली बार नहीं है, जब अमेरिका ने अपने हितों के लिए विदेशी आउटलेटों को फॉरेन मिशन घोषित किया हो। इससे पहले भी शीत युद्ध के दौरान फॉरेन मिशन के रूप में सोवियत मीडिया आउटलेटों को नामित किया गया था। यह घटनाक्रम संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच संबंधों को दर्शाता है, जो विभिन्न मुद्दों और विवादों के बाद पैदा हुए हैं, जहां लड़ाई अलग सिरे से लड़ी जा रही है। जो यह संदेश दे रहा है कि चीनी मीडिया पत्रकारिता का नहीं, बल्कि चीन सरकार का प्रतिनिधि है।

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